माँ चाहिए ,बहन चाहिए, पत्नी चाहिए, फिर बेटी क्यों नही चाहिए-पढ़े- Hindi Story Online  

यह कहानी आज के समय की है     “एक बेटी की कहानी”

यह कहानी एक सच्ची घटना है एक गरीब परिवार की बात है एक छोटा सा परिवार  था उसमे माता-पिता और उनकी एक प्यारी सी बेटी रहती थी जिसका नाम रेखा था  यह परिवार बहुत गरीब था. रेखा अभी छोटी थी वह  1st class में पढ़ रही थी वो हर ऱोज स्कूल जाती और घर आ  कर घर का काम व स्कूल का Homework करती. रेखा पढाई में Intelligent थी. रेखा अपने life से बहुत खुश थी उसे अपने माता-पिता से कोई शिकायत नही थी. रेखा को  जैसा भी मिलता खाने को पहने को वो ले लेती थी.जैसे-जैसे समय बिताता गया वैसे-वैसे रेखा बड़ी होती गई.

एक दिन की बात है रेखा के माता-पिता आपस में बात कर रहे थे  की हमारी बेटी बड़ी हो गई है अब इसकी शादी करनी होगी पर हमारे पास शाम की रोटी के लिए पैसे नही होते है हम इसकी शादी कैसे करवाए, बहुत सोचने के  बाद इन्होने एक  Deccion ले लिया की हम अपनी बेटी को मार देगे और हमारे पास इसके अलावा कोई रास्ता नही है. यह कह कर दोनों ने अपने दिल पर पत्थर रख लिया और Plan करने लग गए की कैसे मारे.

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अपनी ही बेटी को कुल्हाड़ी से मारने का दिन

अगले दिन रेखा जब उठी स्कूल जाने के लिए तब उसकी माता बोली बेटी तू आज स्कूल रहने दे आज तेरे पिता जी के साथ जंगल में जा कर लकड़ी ले आओ आज मेरे तबियत ख़राब है. यह सुनकर रेखा ने स्कूल की टाल मार दी. जंगल में जाने से पहले रेखा की माँ बार-बार रेखा को गले लगा रही है और रो भी रही है. रेखा बोलती है आज क्या हुआ माँ आज ज्यादा ही प्यार आ रहा है, उसकी माँ बोलती है बस मन कर रहा था तभी.

रेखा अपने पिता जी के साथ जंगल में चली जाती है.” जो की जंगल में रेखा को मारने का प्लान बनाया हुआ है इसे कुल्हाड़ी से मार के जंगल में ही गड्डा खोद कर दबा देगे”.  रास्ते में चलते – चलते रेखा के पिता जी को ठोकर लग जाती है और वो बुरी तरह नीचे गिर जाते है उन्हें चोट भी लग जाती है तब रेखा अपने पिता जी को आराम से बिठा कर अपनी चुनी फाड़ कर जख्म को साफ़ कर के वहाँ पर अपनी चुनी लपेट दे देती है और फिर आगे निकल जाते है. रेखा के पिता जी रेखा को Side में बिठा कर गड्डा खोदने लग जाते है.  रेखा देख रही होती है की पिता जी कितनी मेहनत कर रहे है रेखा अपने पिता जी को पानी ला कर देते है बार-बार कुछ न कुछ मदत कर रही होती है और आखिर में रेखा बोलती है अब मुझे दे दो पिताजी अब  मै गड्डा खोद देती हूँ. आप जा कर बैठ जाओ ये कहते ही उसके पिताजी का दिल पसीज जाता है और उसे गले लगा लेता है और जोर से रोने लग जाता है, बेटी ये गड्डा मै तेरे लिए खोद रहा था मै तुझे मार कर इस गड्डा में डाल देता. अब तू बड़ी हो गई है और हमारे पास तेरी शादी करवाने के लिए पैसे नही है.

रेखा रोती हुई बोलती है पिता जी मुझे शादी नही करनी है आप मुझे मत मारो मै स्कूल भी नही जाती आज से..

तब उसके पिता जी बोले बेटी अब तू चुप हो, मै तेरी शादी भी करवाऊंगा और तुझे स्कूल भी जाना है. बाप-बेटी बहुत खुश थे और  दोनों ख़ुशी-ख़ुशी घर पर चले जाते है.

दोस्तों आज हम बेटी को भोज समजने लग गए है आखिर क्यों? आज का समय ऐसा  है आपका बेटा ही आप को घर से भर निकल रहा है आपका बीटा आपके उप्पेर हाथ उठा देता है आप को अपने बेटे से देर के रहना पढता है इतना सब होने के बाद भी आपको बेटा छायी . आज तक अपने कभी सुना है की एक बेटी ने अपने पिता जी को घर से बहार निकल  दिया या हाथ उठा दिया then  फिर भी आपको बेटा चाहिए  बेटी नही..

आज के समय में  आपकी तकलीफ में आपकी बेटी साथ देते है न की आपका बेटा.

माँ चाहिए

बहन चाहिए

पत्नी चाहिए 

फिर बेटी क्यों नही चाहिए  

So Save Girl

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